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April 5-7 2013

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आरोग्य-उपचार::

acupunctureकपालीय त्रिकास्थि चिकित्सा (क्रैनियल सैक्रल थेरापी)

यह सीधा-सच्चा, अनाक्रामक स्पर्श-निदान है जिसका उपयोग कपालीय त्रिकास्थि प्रणाली की विषंगतियों और रुकावटों के आकलन और उन्हें दूर करने के लिये किया जाता है. इस प्रक्रिया से केन्द्रीय स्नायु प्रणाली तथा अन्य शरीर-प्रणालियां अवसाद रहित अवस्था को पुनः प्राप्त करती हैं.

इस तकनीक की मदद से पूरी केन्द्रीय स्नायुमंडल प्रणाली में मस्तिष्क मेरु-द्रव्य का प्रवाह अच्छी तरह संचालित होने लगता है. इस प्रकार हमारी स्नायु प्रणाली के समानान्तर, खास तौर पर मस्तिष्क एवं मेरु-रज्जु के आस-पास, अंतःझिल्लियों का सहज स्पन्दन फिर से शुरु हो जाता है. अतएव, हमारा फ़ोकस सीधे अस्थियों या रन्ध्रों पर न होकर इन झिल्लियों पर होता है.

कपालीय त्रिकास्थि निर्गम सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं, शारीरिक अभिघात तथा भावनात्मक दुःस्थितियों के व्यापक क्षेत्र में कारगर होता है. यह माइग्रेन, TMJ, बार-बार होने वाले साइनस एवं कानों के संक्रमण, मेरुदंड की क्षतियों, लम्बे समय से चली आ रही क्लान्ति की दशाओं इत्यादि में काफ़ी सुधार ला सकने में सक्षम है.end of article


DISCLAIMER:  The extent of the response to treatment varies from patient to patient — even with similar diagnosis — as the internal bodily environment is unique to each individual patient.

एम.टी.ओ. हॉलिस्टिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सा का मतलब है “सम्पूर्ण” व्यक्ति का उपचार करना - भीतर और बाहर. इसमें बाहरी और पर्यावरणीय प्रभावों तथा अन्य बातों के साथ-साथ भौतिक शरीर, विचार और भावनाएँ, आध्यात्मिक सरोकार, शरीर के अन्दर और इर्द-गिर्द के ऊर्जा-क्षेत्र इत्यादि शामिल हैं.

स्थितियाँ जिनका हम उपचार करते हैं: एलर्जी, स्वलीनता (Autism), स्वघटित रोग-प्रतिरोधकता सम्बन्धी कठिनाइयां, रक्त-शर्करा सम्बन्धी गड़बड़ी, कैन्सर, हृदय सम्बन्धी स्थितियाँ, पाचन सम्बन्धी दोष, अंतःस्रावी असंतुलन (एड्रिनल, गर्भाशय/ वृषण, पीयूष, थाइराइड), प्रतिरोधक गड़बड़ियां, लसीकावाहिका सम्बन्धी कठिनाइयां, न्यूरॉलोजिकल दोष, मनोवैज्ञानिक दोष (लत, चिन्ता, अवसाद, उद्विग्न- बाध्यतापूर्ण/ भोजन व्यवहार)