| पहला, किसी को हानि मत पहुँचाइए. |
अनाक्रामक उपचार-विधि अपनाइए जो न्यूनतम हानिकारक अनुषंगी प्रभाव उत्पन्न करे. |
| कारण तलाशिए. |
बीमारी के अंतर्निहित कारण जीवन-शैली, पर्यावरण एवं/अथवा भोजन में खोजिए. |
| प्रकृति की आरोग्यकारी शक्ति तक अपनी पहुँच कायम कीजिए. |
ऐसी पद्धतियों, उपचारों और तकनीकों का प्रयोग कीजिए जो हमारे प्राकृतिक स्वास्थ्य मॅकेनिज्म में सहायता पहुँचाए. |
| समग्र व्यक्ति का उपचार कीजिए. |
व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक, आहार सम्बंधी, आनुवंशिक, पर्यावरणीय एवं जीवन-शैली सम्बंधी अन्य कारकों पर विचार कीजिए जिनसे उस व्यक्ति पर प्रभाव पड़ सकता हो. |
| उसे शिक्षित कीजिए. |
दीर्घायु एवं स्थायित्वपूर्ण स्वास्थ्य की दिशा में सहायक आवश्यक प्रशिक्षण एवं प्रेरणा प्रदान कीजिए. |
| रोग से बचाव कीजिए. |
भविष्य में हो सकने वाले असंतुलन से बचाने के लिए स्वस्थ एवं उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन जीने के प्रति सजग बनाइए. |