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पराबैंगनी रक्त किरणन
पराबैंगनी रक्त किरणन प्रक्रिया के तहत किसी नस से एक बन्द, निर्जीवकृत नलिका में रक्त निकाला जाता है. नलिका मे प्रवाहित होते हुए इस रक्त को 60 सीसी के एक सिरिंज में पराबैंगनी किरणों, प्रकाश परादर्शन, से गुजारा जाता है. इस प्रकार परिशोधित रक्त को पुनः उसी नलिका के ज़रिये नस में प्रवाहित कर दिया जाता है. सारे उपकरण निर्जीवीकृत (स्टराइल) होते हैं और प्रत्येक उपयोग के बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता है.
इस उपचार के कई लाभों में शामिल हैं: रक्त ओषजन में वृद्धि, रोग प्रतिरोध प्रणाली का विकास, रक्तप्रवाही संक्रामक विषाणुओं एवं वैक्टीरिया का निष्क्रियकरण तथा ग़ैर-आवश्यक फंगस और वैक्टीरिया के विकास का निर्मूलीकरण. इस उपचार से विषाक्तता का भी तेजी से ह्रास होता है.
विषाणुओं एवं वैक्टीरिया के संक्रमण के उपचार के अलावा पराबैंगनी परावर्तन अन्य कई दशाओं में भी लाभदायक है जैसेकि शिथिल रक्त-प्रवाह, ब्लड काउंट की कमी, एलर्जी, मधुमेह तथा कैन्सर-प्रतियुक्त दशाओं में. इससे भी बढ़कर, इसमें शोथ-प्रतिकारक (ऍन्टी-इन्फ्लैमेट्री) गुण होते हैं जिससे कि यह जोड़ों की गठिया, दमा, पुरानी क्लान्ति के लक्षणों, स्वघटित प्रतिरोध-क्षमता की कमी एवं फाइब्रोमॅल्गिया जैसी दुःस्थितियों में एक कारगर उपचार सिद्ध होता है.
दमा के लिये आधान (इन्फ्यूजन)
यह खास तौर पर गंधक-संवेदी लोगों एवं अन्य दमा रोगियों में कारगर होता है.
विन्दुकित (Macular) आधान
यह आधान उन लोगों में दृष्टि-क्षमता के विकास के लिये नियोजित है जो विन्दुकित / चित्तीदार अपघटन (मॅक्युलर डिजेनेरेशन) से पीड़ित हैं.
ग्लुटेथियन (Glutathione) आधान
यह आधान मस्तिष्क-ऊतकों की सहायता करता है तथा यकृत के निर्विषीकरण को प्रेरित करता है. साथ ही यह कई प्रकार की स्नायविक व्याधियों के उपचार मे भी प्रयुक्त होता है.
ग्लिसरिजिन (Glycyrrhizin) आधान
यह उपचार यकृत के दोषों, जैसे हेपटाइटिस, के लिये लक्षित है.
C+MC: विटामिन C एवं केसियम (Cesium)
यह आधान गंभीर और पुराने अम्लरक्तक रोगों, जैसेकि कैन्सर, के इलाज में प्रयुक्त होता है.
विटामिन C और केसियम पूरी प्रणाली में क्षारीय गुण की अभिवृद्धि करने में अत्यंत प्रभावी हैं जिसका खास तौर पर कैन्सर के इलाज़ में बहुत ही महत्व है. विटामिन C और केसियम ऐसे पांच तत्वों में से दो हैं जिनके बारे मे विदित है कि वे कैन्सर कोशिका की कोशिका-झिल्ली से आसानी से गुजर सकते हैं.
लाइपोइक (Lipoic) एसिड +MC2
इस आधान से यकृत के काम करना बन्द कर देने की स्थिति, साइरॉसिस, हेपटाइटिस तथा यकृत संबन्धी सभी कार्य-प्रणालियों के सुधार में मदद मिलती है. यह यकृत के कार्य को सामान्य बनाने और इसकी स्थिति सुधारने में अति प्रभावी है. जर्मनी में किये गये शोध अध्ययनों के रिपोर्ट के अनुसार, यह यकृत के "पुनर्निर्माण" में भी सफल सिद्ध हुआ है.
PALT: प्रोलीन, आर्गिनाइन, टायरोसिन
इस अंतःशिराभ संयोजन में अमिनो एसिड शामिल होते हैं जोकि मैट्रिक्स मेटलोप्रोटिनेज निरोधकों को उत्प्रेरित करके अनियंत्रित कोशिकीय प्रतिफलन को रोकने मे कारगर सिद्ध हुए हैं.
PTC: फॉस्फेटाइडिल कोलाइन
अनेक प्रकार की न्यूरॉलोजिकल गड़बड़ियों के उपचार में प्रयुक्त होनेवाला यह आधान मस्तिष्क ऊतकों को लाभ पहुंचाता है तथा यकृत के निर्विषीकरण को उत्प्रेरित करता है.
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