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ऑक्सीजन चिकित्सा
ओजोन चिकित्सा  back to top

ozone moleculeबहुत सारे वैज्ञानिक और डॉक्टर यह मानते हैं कि अनेक स्वास्थ्य समस्याएं ऑक्सीजन की कमी के कारण होती हैं. स्वस्थ कोशिकाएं वायव्य (एरॉबिक) होती हैं जिसका मतलब यह है कि जीवित रहने के लिये उन्हे ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है. अस्वस्थ कोशिकाएं, बॅक्टीरिया और विषाणु अ-वायव्य (ऍनोरॅबिक) होते हैं अर्थात वे ऑक्सीजन के अभाव में ही जीवित रह सकते हैं.

ओजोन ताजी हवा का एक प्राकृतिक घटक है. यह धरती के ऊपरी वातावरण में (जोकि ओजोन सुरक्षा परत की रचना करता है) सूर्य की पराबैंगनी किरणों से उत्पन्न हो सकता है या फिर इसे कृत्रिम रूप से ओजोन जनित्र की सहायता से बनाया जा सकता है.

ऑक्सीजन के अणु की तुलना में जिसमें केवल दो परमाणु होते हैं, ओजोन के एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं. चूंकि ओजोन एक बड़ी ही प्रतिक्रियात्मक और अर्ध-जीवित रहने वाली गैस है, जोकि शीघ्र ही ऑक्सीजन में बदल जाती है, अतः ओजोन मानव द्वारा उत्पन्न किया सकने वाला सर्वाधिक शक्तिशाली तथा त्वरित ऑक्सीडाइजर है. यह किसी भी बॅक्टीरिया, मोल्ड या यीस्ट के बीजाणुओं, जैविक पदार्थों और विषाणुओं को ऑक्सीडाइज कर सकता है.

ओजोन बैगिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ओजोन और ऑक्सीजन एक पंप के ज़रिये उपचार के लिये लक्षित क्षेत्र को आवृत्त करते हुए एक हवाबंद बैग में भरे जाते हैं और शरीर के ऊतकों को इस मिश्रण का अवशोषण करने दिया जाता है.

अतिदाब ऑक्सीजन चिकित्सा  back to top

hyperbaric nozzlesयह उपचार सामान्य वातावरणीय दवाब से अधिक दवाब पर शत प्रतिशत विशुद्ध ऑक्सीजन के साथ पूरे शरीर का अंतरिम उपचार करता है जिससे अन्ततः शरीर की प्राकृतिक आरोग्य क्षमता काफ़ी बढ़ जाती है.

उच्च डोज़ में ऑक्सीजन चिकित्सा अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन, यू.एस. फूड ऐंड ड्रग ऍडमिनिस्ट्रेशन और मेडिकेयर द्वारा अनुमोदित उपचार-विधि है. हालांकि कई बार इसका प्राथमिक आकस्मिक चिकित्सा के तौर पर इस्तेमाल होता है किंतु अक्सर इसका उपयोग कम खर्च वाले सहायक या विकासकारक चिकित्सा के रूप में किया जाता है.

इस उपचार से लाभान्वित होने वाले मरीज़ वे हैं जो अल्प-ऑक्सीयता (हाइपॉक्सिया) से होने वाली बीमारियों या हानिकारक प्रभावों से ग्रस्त होते हैं या फिर कोशिकीय स्तर पर जिन्हें ऑक्सीजन का अभाव झेलना पड़ता है. यह कोशिकीय ऊतक स्तर ही है जहां से समस्त जीवन का आरम्भ होता है.

H2O2 के साथ ऑक्सिडेटिव चिकित्सा  back to top

oxygen moleculeहालांकि यह शरीर के अन्दर निर्मित होने वाला एक प्राकृतिक तत्व है फिर भी माना जाता है कि हाइड्रोजन पॅरोक्साइड, H2O2, ऑक्सीडेटिव उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधि है. इस उपचार विधि में क्षीण किन्तु अत्यंत विशुद्ध हाइड्रोजन पॅरोक्साइड को चीनी या नमक के घोल में मिलाया जाता है जैसाकि आम तौर पर अस्पतालों में अंतःशिराभ ख़ुराक के तौर पर उपयोग किया जाता है. फिर इसे 1 से 3 घंटे की अवधि तक 50–500 मिली. के डोज़ में किसी बड़ी शिरा में इंजेक्ट किया जाता है. यह सब ख़ुराक की मात्रा और मरीज़ की दशा पर निर्भर है.

ऑक्सीडेटिव चिकित्सा के प्रभाव-विस्तार के लिये इस उपचार को पराबैंगनी रक्त किरणन (Ultraviolet Blood Irradiation) विधि के साथ भी संयोजित किया जा सकता है.

पराबैंगनी रक्त किरणन  back to top

moleculeपिछले कुछ दशकों में यह वैज्ञानिक रूप से तय हो चुका है कि विभिन्न तरंग-दीर्घताओं वाली पराबैंगनी किरणें रक्त-वाहित रोगजनों को नष्ट करने में अविश्वसनीय रूप से प्रभावी सिद्ध हुई हैं. साथ ही वे शरीर की अपनी रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को भी मजबूत बनाती हैं. प्रकाश-सक्रिय (फोटोऍक्टिव) तत्वों के सम्बन्ध मे हुई खोज़ों के साथ-साथ, इलेक्ट्रोनिक्स, बल्ब्स और लेज़र किरणों के क्षेत्र में हुए नए आविष्कारों से अब यह तकनीक विकास का एक नया आयाम प्राप्त कर चुका है.

पराबैंगनी रक्त किरणन चिकित्सा में आपके शरीर से 60–250 सीसी रक्त निकाला जाता है, उसे एक 'चेम्बर' से गुजारा जाता है, पराबैंगनी प्रकाश मे उसे 'परिशोधित' किया जाता है और फिर वापस आपके शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है.

 

 

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