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— आकलन एवं उपचार — अंतःशिराभ आधान
जब पूरक विटामिन मौखिक रूप से लिए जाते हैं तो समग्र उपापचय की दृष्टि से शरीर की क्षमताएं सीमित रहती हैं. जब ये पूरक विटामिन पेट और पाचन-मार्ग में प्रविष्ट किए जाते हैं तो जबतक कि शरीर उन्हें प्रणाली से बाहर न हटा दे, यकृत (लीवर) के पास इतना समय नहीं होता कि वह सभी विटामिनों का उपापचय कर सके. परिणामस्वरूप, इसके पहले कि वे विटामिन हमें कोई लाभ दे सकें, अधिकांश पूरक तत्व शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं. उदाहरण के लिए: 2 ग्राम से अधिक विटामिन सी की मौखिक खुराक से दस्त लग सकते हैं, जबकि अंत:शिराभ आधान के रूप में 25 ग्राम तक लेने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती. विशेषज्ञता वाले आधान
पराबैंगनी रक्त किरणन प्रक्रिया के तहत किसी नस से एक बन्द, निर्जीवकृत नलिका में रक्त निकाला जाता है. नलिका मे प्रवाहित होते हुए इस रक्त को 60 सीसी के एक सिरिंज में पराबैंगनी किरणों, प्रकाश परादर्शन, से गुजारा जाता है. इस प्रकार परिशोधित रक्त को पुनः उसी नलिका के ज़रिये नस में प्रवाहित कर दिया जाता है. सारे उपकरण निर्जीवीकृत (स्टराइल) होते हैं और प्रत्येक उपयोग के बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता है. इस उपचार के कई लाभों में शामिल हैं: रक्त ओषजन में वृद्धि, रोग प्रतिरोध प्रणाली का विकास, रक्तप्रवाही संक्रामक विषाणुओं एवं वैक्टीरिया का निष्क्रियकरण तथा ग़ैर-आवश्यक फंगस और वैक्टीरिया के विकास का निर्मूलीकरण. इस उपचार से विषाक्तता का भी तेजी से ह्रास होता है. विषाणुओं एवं वैक्टीरिया के संक्रमण के उपचार के अलावा पराबैंगनी परावर्तन अन्य कई दशाओं में भी लाभदायक है जैसेकि शिथिल रक्त-प्रवाह, ब्लड काउंट की कमी, एलर्जी, मधुमेह तथा कैन्सर-प्रतियुक्त दशाओं में. इससे भी बढ़कर, इसमें शोथ-प्रतिकारक (ऍन्टी-इन्फ्लैमेट्री) गुण होते हैं जिससे कि यह जोड़ों की गठिया, दमा, पुरानी क्लान्ति के लक्षणों, स्वघटित प्रतिरोध-क्षमता की कमी एवं फाइब्रोमॅल्गिया जैसी दुःस्थितियों में एक कारगर उपचार सिद्ध होता है. दमा के लिये आधान (इन्फ्यूजन) यह खास तौर पर गंधक-संवेदी लोगों एवं अन्य दमा रोगियों में कारगर होता है. विन्दुकित (Macular) आधान यह आधान उन लोगों में दृष्टि-क्षमता के विकास के लिये नियोजित है जो विन्दुकित / चित्तीदार अपघटन (मॅक्युलर डिजेनेरेशन) से पीड़ित हैं. ग्लुटेथियन (Glutathione) आधान यह आधान मस्तिष्क-ऊतकों की सहायता करता है तथा यकृत के निर्विषीकरण को प्रेरित करता है. साथ ही यह कई प्रकार की स्नायविक व्याधियों के उपचार मे भी प्रयुक्त होता है. C+MC: विटामिन C एवं केसियम (Cesium) यह आधान गंभीर और पुराने अम्लरक्तक रोगों, जैसेकि कैन्सर, के इलाज में प्रयुक्त होता है. विटामिन C और केसियम पूरी प्रणाली में क्षारीय गुण की अभिवृद्धि करने में अत्यंत प्रभावी हैं जिसका खास तौर पर कैन्सर के इलाज़ में बहुत ही महत्व है. विटामिन C और केसियम ऐसे पांच तत्वों में से दो हैं जिनके बारे मे विदित है कि वे कैन्सर कोशिका की कोशिका-झिल्ली से आसानी से गुजर सकते हैं. लाइपोइक (Lipoic) एसिड +MC2 इस आधान से यकृत के काम करना बन्द कर देने की स्थिति, साइरॉसिस, हेपटाइटिस तथा यकृत संबन्धी सभी कार्य-प्रणालियों के सुधार में मदद मिलती है. यह यकृत के कार्य को सामान्य बनाने और इसकी स्थिति सुधारने में अति प्रभावी है. जर्मनी में किये गये शोध अध्ययनों के रिपोर्ट के अनुसार, यह यकृत के "पुनर्निर्माण" में भी सफल सिद्ध हुआ है. PALT: प्रोलीन, आर्गिनाइन, टायरोसिन इस अंतःशिराभ संयोजन में अमिनो एसिड शामिल होते हैं जोकि मैट्रिक्स मेटलोप्रोटिनेज निरोधकों को उत्प्रेरित करके अनियंत्रित कोशिकीय प्रतिफलन को रोकने मे कारगर सिद्ध हुए हैं. PTC: फॉस्फेटाइडिल कोलाइन अनेक प्रकार की न्यूरॉलोजिकल गड़बड़ियों के उपचार में प्रयुक्त होनेवाला यह आधान मस्तिष्क ऊतकों को लाभ पहुंचाता है तथा यकृत के निर्विषीकरण को उत्प्रेरित करता है. प्रति-संक्रामक आधान
इस आधान के माध्यम से ऊपरी श्वसनतंत्र और साइनस के संक्रमण जैसे संक्रामक रोगों तथा फेफड़ों के पुराने अवरोधकारी रोगों में उपचार किया जाता है. साथ ही यह आधान गैंग्रीन के ऊतकों को स्वस्थ करने में भी उपयोगी है. ओष्ठ चिकित्सा (Chelation)
बढ़ती उम्र के साथ होने वाले हृदय एवं वाहिकीय रोगों, जैसे: धमनी सम्बन्धी वाहिकीय रोग, परिसरीय वाहिका रोग, अति-तनाव तथा ऐंजीना जैसी व्याधियों में लाभदायक है. यह उपचार मधुमेह, विन्दुकित अपघटन (मॅक्युलर डिजेनेरेशन), आर्थ्राइटिस एवं ऑस्टिओपॉरोसिस में भी लाभदायक है. DMPS चेलैशन यह उपचार शरीर के अन्दर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्प्रेरित करता है, खास तौर पर पारद, लीड तथा अन्य भारी धातुओं को. चैलेंज टेस्ट चेलैशन हालांकि EDTA और DMPS ये दोनों ही आम तौर पर शरीर के अन्दर भारी धातुओं के निदान के लिये दिए जाने वाले उपचार हैं परन्तु इनका उपयोग विषघ्नता उपचार में भी किया जा सकता है. पोषक आधान
एसॉर्बिक एसिड विटामिन C का वह प्रकार है जो जल मे घुल सकता है. यह एक शक्तिशाली प्रतिजारक (ऍन्टी-ऑक्सीडेंट) माना जाता है और अध्ययनों से पता चला है कि इस पोषक तत्व से हृदय रोगों और कैन्सर से होने वाली अकाल मृत्यु को थामा जा सकता है. इन प्रतिजारक लाभों के अलावा, एसॉर्बिक एसिड मज्जा (कॉलेजेन) के निर्माण में भी मुख्य भूमिका निभाता है. कॉलेजेन ऊतक कोशिकाओं, मसूढ़ों, रक्त वाहिकाओं, अस्थियों और दांतों के विकास और मरम्मत के लिये अत्यावश्यक है. वयोवृद्ध लोगों और धूम्रपान करने वालों को कम उम्र के लोगों की तुलना में इस विटामिन की अधिक ज़रूरत होती है. मॅयर्स कॉकटेल (Myers Cocktail) स्वर्गीय डॉ. जॉन मॅयर्स, MD , ने विविध क्लीनिकल दशाओं के उपचार के लिये एक अंतःशिराभ विटामिन एवं मिनरल फॉर्मूला का उपयोग किया था. "मॅयर्स कॉकटेल" में मॅग्नेशियम, कॅल्शियम, B विटामिन्स, विटामिन C इत्यादि होते हैं और इसे पुराने दमा रोगों, माइग्रेन, क्लान्ति, पुरानी क्लान्ति के लक्षणों सहित, फाइब्रोमॅल्गिया, मांसपेशियों की ऐंठन, ऊपरी श्वसनतंत्र सम्बन्धी संक्रमणों, साइनसाइटिस के पुराने रोगों, मौसमी एलर्जी के कारण होने वाले नासिका-शोथ, हृदय-वाहिकीय रोगों तथा अन्य प्रकार की व्याधियों में बहुत ही कारगर पाया गया है. मिनरल आधान अच्छे स्वास्थ्य के लिये शरीर मे मिनरल की उचित मात्रा बनाये रखना बहुत ही ज़रूरी है. मिनरल्स तथा ट्रेस मिनरल्स सभी जीवित कोशिकाओं की संरचना एवं उनकी समुचित कार्य प्रणाली के लिये अत्यावश्यक कारक हैं. विटामिनों के ही समान, मिनरल कोएंजाइम्स के रूप में कार्य करते हैं जिनसे शरीर की कार्यक्षमता, ऊर्जा, विकास और स्वास्थ्य की अभिवृद्धि होती है. अमीनो एसिड आधान अमीनो एसिड शरीर के "रचनात्मक आधार" हैं. कोशिकाओं के निर्माण तथा ऊतकों की मरम्मत करने के साथ-साथ वे ऍन्टीबॉडीज की भी रचना करते हैं जो बॅक्टीरिया और विषाणुओं के आक्रमण से हमारी रक्षा करते हैं तथा वे एंजाइम और हॉर्मोन प्रणाली के अंग हैं. वे न्युक्लिओप्रोटीन्स (RNA तथा DNA) का निर्माण करते हैं, पूरे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बनाते हैं और मांसपेशीय कार्यकलापों में भाग लेते हैं. जब पाचन-प्रणाली में प्रोटीन का अपखंडन होता है तो 22 ज्ञात अमीनो एसिड बच जाते हैं. इनमें से आठ अत्यावश्यक होते हैं (अर्थात वे शरीर के अन्दर नहीं बनते). बाकी बचे अनावश्यक होते हैं अर्थात शरीर उनका निर्माण कर लेता है बशर्ते कि सही पोषण प्राप्त हो. इस आधान के द्वारा अपशोषण एवं आमाशय की कठिनाइयां दूर हो जाती हैं और यह ऐसे मरीज़ों के लिये भी लाभदायक है जो ऊतकों के अपक्षय, अवसाद या किसी लत से पीड़ित हैं.
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पोषक तत्वों को अंत:शिराभ (IV) आधान के रूप में दिए जाने से सीरम (लसीका) का संकेन्द्रण प्राप्त किया जा सकता है जो कि मौखिक या अंत:मांसपेशीय तरीके से संभव नहीं है.
पराबैंगनी रक्त किरणन
H202 आधान
EDTA चेलैशन
विटामिन C आधान